Thursday, 1 September 2011

छोड़ो सोचना

कल का जीवन धोखा है 

 


जीना मुश्किल आज हो रहा
कल को किसने देखा है

आज का जीवन सत्य तुम्हारा
कल का जीवन धोखा है

हंस लो गा लो, गले लगा लो
रूठे को तुम आज मना लो

जो हो तुमसे दूर तुम्हारे
कर निवेदन पास बुला लो

धो लो मन के कलुष आज ही
मतभेदों को आज मिटालो

छोड़ों ना कुछ भी कल पर
सारे काम आज निपटा लों

कभी नहीं आता कल अपना
रहता आज हेशा संग

कल के आशा जो है रहता
जीवन भर वो लड़ता जंग

छोड़ो सोचना भूत काल की
वर्तमान का साथ निभालों!


जीना मुश्किल आज हो रहा
कल को किसने देखा है

आज का जीवन सत्य तुम्हारा
कल का जीवन धोखा है
!

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